जगदलपुर : पोलावरम् परियोजना एवं बोधघाट परियोजना निर्माण हेतु मिला था एक साथ अनुमति: बोधघाट परियोजना से होगा 300 मेगावाट विद्युत उत्पादन

जगदलपुर 24 जून 2020 बहुउद्देषीय बोधघाट परियोजना इंद्रावती नदी पर प्रस्तावित है, जो कि गोदावरी नदी की मुख्य सहायक नदी है। छत्तीसगढ़ राज्य में इंद्रावती नदी कुल 264 किलोमीटर में प्रवाहित होती है। बोधघाट परियोजना दन्तेवाड़ा जिले के विकासखण्ड एवं तहसील गीदम के ग्राम बारसूर से लगभग 8 किलोमीटर तथा जगदलपुर शहर से लगभग 100 किलोमीटर दूरी पर प्रस्तावित है। इस परियोजना हेतु वर्ष 1979 में पर्यावरण स्वीकृति मिली थी। वन संरक्षण अधिनियम 1980 लागू होने के उपरांत वर्ष 1985 में पुनः पर्यावरण स्वीकृति प्राप्त हुई। विभाग द्वारा प्रभावित वनभूमि के बदले 8419 हेक्टेयर भूमि में क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण किया गया था, जिसके आधार पर वन सरंक्षण अधिनियम 1980 लागू होने के उपरांत पुनः वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 5704.332 हेक्टेयर भूमि हेतु 05 फरवरी 2004 को सैद्धांतिक सहमति प्रदान की गई। योजना का सर्वेक्षण, अनुसंधान एवं विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार कर भारत शासन के विभिन्न मंत्रालयों से स्वीकृति प्राप्त किए जाने का कार्य भारत शासन के मिनिरत्न उपक्रम मेसर्स वाप्कोस लिमिटेड को सौपा गया है। पोलावरम् परियोजना एवं बोधघाट परियोजना एक साथ प्रारंभ हुए थे परन्तु पोलावरम् परियोजना का निर्माण कार्य 70 प्रतिशत से अधिक संपन्न हो गया है एवं बोधघाट परियोजना के कार्य नहीं हो सका।
     
     बोधघाट और पोलावरम् परियोजना में तुलनात्मक रूप से देखे तो

कुल जल ग्रहण क्षेत्र बोधघाट (प्रस्तावित) में 15280.90 वर्ग किमी., पोलावरम् में 306643 वर्ग किमी.।
जलाषय का विवरण में बांध का उच्च स्तर बोधघाट का 471 मी. पोलावरम् 53.32मी.।
उपयोगी जल भण्डारण में बोधघाट 3715.40 मि.घ.मी. पोलावरम् में 2130 मि.घ.मी.।
पूर्ण जल स्तर डूबान क्षेत्र के अन्तर्गत बोधघाट 13783.147 हेक्टेयर पोलावरम् में 47367.18 हेक्टेयर।
सिंचाई क्षमता में बोधघाट से 366580 हेक्टेयर पोलावरम् 436804 हेक्टेयर।
विद्युत उत्पादन में बोधघाट में 300 मेगावाट पोलावरम् में 1040 मेगावाट।
डूबान प्रभावित ग्राम में बोधघाट (प्रस्तावित) परियोजना से 42 और पोलावरम् परियोजना से 288 जिसमें छत्तीसगढ़ के 09 गांव प्रभावित है। विस्थापित होने वाले परिवारों की जनसंख्या 12,888 जबकि पोलावरम् परियोजना से 1 लाख 95,357 प्रभावित हुए हैं।

         इन्द्रावती नदी कैचमेंट से छत्तीसगढ़ द्वारा पूर्ण योजनाओं में 11.091 टी.एम.सी. तथा निर्माणाधीन योजनाओं अन्तर्गत 1.932 टी.एम.सी. कुल 13.023 टी.एम.सी. जल उपयोग किया जा रहा है। बोधघाट परियोजना अन्तर्गत प्रस्तावित जल उपयोग की मात्रा 155.911 टी.एम.सी. है। गोदावरी जल विवाद अभिकरण द्वारा आबंटित 300 टी.एम.सी. (8496 मि.घ.मी.) जल के विरूद्ध छत्तीसगढ़ राज्य द्वारा बोधघाट परियोजना सहित केवल 168.934 टी.एम.सी. (4784 मि.घ.मी.) जल का उपयोग प्रस्तावित है, अतः योजना निर्माण में कोई अंतर्राज्यीय मुद्दा नहीं है।

जगदलपुर : विकासखण्ड जगदलपुर के नवीन ग्राम पंचायतों में उचित मूल्य की दुकान संचालन हेतु आवेदन आमंत्रित 3 जुलाई तक

जगदलपुर 24 जून 2020 अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) जगदलपुर के द्वारा शासकीय उचित मूल्य दुकान के संचालन हेतु आंबटन की कार्रवाई किया जाना है। जिसमें विकासखण्ड जगदलपुर के नवीन ग्राम पंचायत बुरूंदवाड़ा, सेमरा, मारकेल-2, कुरंदी-2, बिलौरी-2, पंडरीपानी-2, बुलगांव, जामावाड़ा-2, बड़े बोदल, नागलसर, कैकागढ़, तिरिया स्थित शासकीय उचित मूल्य दुकान के संचालन के लिए इच्छुक पंजीकृत सहकारी समितियां, ग्राम पंचायत, महिला समूह, वन सुरक्षा समिति से 24 जून से 3 जुलाई तक कार्यालयीन अवधि में आवश्यक दस्तावेज के साथ कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) जगदलपुर  में आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।

जगदलपुर : कलेक्टर ने किया परचनपाल हस्तशिल्प विकास बोर्ड एवं बालेंगा में एनआरएलएम के कार्यों का किया अवलोकन
हस्त शिल्पियों के समस्याओं को दूर करने के दिए निर्देश

जगदलपुर 24 जून 2020

कलेक्टर श्री रजत बंसल आज 24 जून को बस्तर विकासखण्ड के परचनपाल एवं बालेंगा में पहुंचकर हस्तषिल्प विकास बोर्ड एवं एनआरएलएम के कार्यों का अवलोकन किया। श्री बंसल परचनापल के हस्तषिल्प विकास बोर्ड के एम्पोरियम एवं टेªनिंग सेंटर का निरीक्षण कर वहां चल रहे कार्यों की जानकारी ली। कलेक्टर ने मौके पर उपस्थित कारीगरों से बातचीत कर उनके षिल्प सामाग्रियों के ब्रिकी हेतु मार्केटिंग व्यवस्था एवं अन्य समस्याओं के संबंध में जानकारी ली। श्री बंसल ने जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं हस्तशिल्प विकास बोर्ड के अधिकारियों को कारीगरों के समस्याओं के निराकरण हेतु जिले के कुल कारीगरों की संख्या एवं उनके कार्यों की सम्पूर्णं ब्योरा एकत्र कर एक सप्ताह  के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। जिससे की योजना बनाकर हस्त शिल्पियों के समस्याओं का निराकरण किया जा सके। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर श्री बंसल ने हस्तषिल्प बोर्ड कार्यालय का भी अवलोकन किया। कलेक्टर श्री बंसल बालेंगा पहुंचकर एनआरएलएम के महिला स्व-सहायता समूह के कार्यों का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने एनआरएलएम समूह के महिलाओं द्वारा निर्माण किए गए साबून का अवलोकन कर इसकी सराहना की।