निराधार लोगों का श्रवणबाल माऊली केअर सेंटर को मिलि राहत संजय घोडावत फाऊंडेशन से

कई निराश्रित, वृद्ध पुरुष व महिलांओं के लिए ममता का सहारा तथा सेवा देनेवाले माऊली केअर सेंटर को संजय घोडावत फाऊंडेशन कि ओर से (सीएसआर निधी) के तहत निरंतर मदद देने का निर्णय लिया गया है 

कोल्हापुर,भारत, 7 मई, 2021 /PRNewswire/ -- जिसमें निराश्रित वृद्ध व्यक्तियो के भोजन-पानी के साथ ऊनकी सार-संभाल के खर्चे का संपूर्ण जिम्मा संजय घोडावत फाऊंडेशन उठाने वाला है | माऊली केअर सेंटर काफी दिनों से आर्थिक समस्याओं का सामना कर रहा है | इसकी जानकारी मिलते ही संजय घोडावत फौंडेशन ने हमेशा कि तरह मदद का हाथ बढाया | साथ ही माऊली केअर सेंटर के संस्थापक अध्यक्ष श्री. दीपक कदम ने इस सेंटर का नाम ''संजय घोडावत फाऊंडेशन संचलित माऊली केअर सेंटर'' करने का निर्णय लिया है | वृद्धाश्रम कई जगह पर है लेकिन ऊन वृद्धों की सेवा करके ऊनको नई  ऊर्जा देने का काम कोल्हापुर स्थित माऊली केअर सेंटर कर रहा है |

सन 2009 में दीपक कदम जी ने अपने मित्र के परिजनों के पिताजी कि सेवा की थी | उसके बाद वर्ष 2012 में ऊनको एक वृद्धा कि सेवा करने का अवसर मिला था | समाज सेवा का यह व्रत ऊनको अपने माता-पिता से प्राप्त हुआ | वृद्ध, निराश्रित लोगों की सेवा करने हेतु सन 2014 में उन्होंने माऊली केअर सेंटर का निर्माण किया | कोल्हापुर स्थित नाना पाटील नगर में सर्वप्रथम किराए के घर में उन्होंने केअर सेंटर की शुरूआत की | देखते ही देखते इस सेंटर में वृद्ध व्यक्तियों की संख्या बढने लगी । उसके कारण उन्होंने संभाजीनगर बस स्टॅन्ड के पास बडी क्षमता वाला केअर सेंटर खडा किया। यहां की सारी सुविधाएं वह मुफ्त रूप में दे रहे हैं। कदम परिवार स्वयं की कमाई पर यह सेंटर चलाता है। आज तक उन्होंने इस सेंटर के माध्यम से 500 से भी ज्यादा निराश्रित, वृद्ध पुरुष-महिलाओं की सार-संभाल की है। उनके इस कार्य को देखते प्रसिद्ध उद्योजक श्री संजय जी घोडावत जी ने दीपक कदम जी को "निराधार लोगों का श्रवणबाल" कहा है | जिस-जिस समय कोल्हापुर, सांगली जिले को मदत की आवश्यकता महसूस हुई है, उस समय संजय घोडावत फाऊंडेशन ने अपना मदद का हाथ आगे बढाया है। फाऊंडेशन ने आज तक अंध-अपंग विद्यालय, बाढग्रस्त, अनाथालय, सूखाग्रस्त किसान, शहीदों के  परिजन, स्वास्थ्य केंद्र, सेवाभावी संस्थाएं, राष्ट्रीय खिलाडी, गरीब तथा जरूरतमंदों को मदद का हाथ आगे बढाकर सामाजिक उत्तरदायित्व निभाया है।

कोरोना विषाणू के पूरे विश्व में कहर बरसाने के कारण संपूर्ण भारतवर्ष में भी जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। ऐसी कठिण परिस्थिति में भी मजदूर,  झुग्गी-झोपडियों में रहनेवाले लोग, गन्ना कटाई मजदूर, अन्य काम करनेवाले मजदूर उनके खाने-पीने की समस्या दूर करने के लिए संजय घोडावत फाऊंडेशन ने ऐसी परिस्थिती में 2 महिने मुफ्त में अनाज   की व्यवस्था की। जिसमें 5 लाख से भी ज्यादा जरूरतमंद लोंगों को फूड पॅकेट की  व्यवस्था,  80 हजार से भी ज्यादा परिवारों को धान की आपूर्ति,  60 हजार से भी ज्यादा जरूरतमंदों को फूड पॅकेट, 30 हजार से भी ज्यादा लोगों को हॅन्ड ग्लोज का वितरण,  15 हजार से भी ज्यादा कोरोना सेवकों के भोजन की व्यवस्था,  10 हजार से ज्यादा फेस मास्क का वितरण किया गया। उसके साथ 6 हजार से भी ज्यादा लोगों का समुपदेशन,  600 से ज्यादा स्वास्थ्य अधिकारी,  डॉक्टर्स,  परिचारिका तथा स्वास्थ्य कर्मचारियों को पीपीई कीट का वितरण किया गया। अहमदाबाद, बेलगाम, हुबली, कोल्हापुर तथा सांगली आदि जगहों पर 'कम्युनिटी किचन' यह योजना सफलतापूर्वक चलाई। घोडावत फाउंडेशन ने मनुष्य के साथ प्राणियों के पालन-पोषण के साथ ऊनके खाद्य की जिम्मेदारी उठाते 5 हजार से भी ज्यादा पालतू जानवरों को जीवनदान दिया है| इसके अलावा घोडावत फाऊंडेशनने लॉकडाऊन के समय में भी वृक्ष संवर्धन की ओर अपना ध्यान केंद्रीत किया। सांगली और कोल्हापूर जिलें मेे करीब 1 लाख के ऊपर वृक्षों को पाणी देकर उनकी रक्षा करने का काम किया। कुल मिलाकर कोरोना की इस जटिल समस्या के समय में मनुष्य, जीव-जंतू, पेड-पौंधे इन सभी को जीवनदान देकर मां के समान ममता देने का कार्य उद्योजक संजय घोडावत जी ने किया है। इसी के तहत समाज के सभी स्तरों से उनका अभिनंदन हो रहा है।

पिछले साल संजय घोडावत जी ने विश्वविद्यालय की 5 इमारतें कोरोना मरीजों के लिये दी है। जिसकी 2 इमारतों में 500 से ज्यादा मरीज स्वास्थ्य संबंधी सुविधांओं का लाभ उठा रहे हैं। बाकी की तीन इमारतों में आशंकाग्रस्त मरीजों को आयसोलेशन तथा इन्स्टिट्यूट क्वारंटाईन किया जा रहा है। करीब आज तक घोडावत कोविड सेंटर में 23000 से ज्यादा मरीज बरी होकर अपने घर पहुंचे है। इस साल भी 350 बेड का 'संजय घोडावत कोविड सेंटर' नये से शुरू किया गया है। इसके साथ 90 ऑक्सीजन बेड की व्यवस्था भी की गई है।

सन 2019 में पूरे राज्य में मुसलाधार वर्षा के कारण जनजीवन अस्ताव्यस्त हुआ था। ऐसी परिस्थिती में पंचगंगा, कृष्णा तथा वारणा नदी के आस-पास के बाढ पीढितों के लिए संजय घोडावत ग्रुप तथा संजय घोडावत विश्वविद्यालय की ओर से राहत कार्य के रूप में हातकणंगले तथा शिरोल तहसील के बाढ पीडितों के लिये मुफ्त में प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं, अॅब्युनलन्स, अनाज,  फूड पॅकेट, बस सुविधा मुहय्या कराने के लिये स्वतंत्र यंत्रनाओं को तैनात किया गया था। जो लोग प्रत्यक्ष रूप से बाढ क्षेत्र में अटक गए थे उन्हें सुरक्षित जगह पर लाने के लिये भी व्यवस्था की गई थी। साथ ही बाढ की स्थिति पूर्ववत होने तक बाढग्रस्तों के लिये भोजन और निवास तथा जानवरों के लिये घास, ‌निवास का प्रबंध करने का काम घोडावत फाऊंडेशन ने दिन-रात किया है।