मुफ्त एचआईवी एड्स और आँख की बीमारी सलाह

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान तथा आँख लाल होने पर तत्काल चिकित्सक से ले सलाह :मौसमी बीमारियों से बचने साफ-सफाई और सावधानी जरूरी

रायपुर, 22 जुलाई 2017 - स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग द्वारा मौसमी बीमारीयों से बचने के लिए आवश्यकवधानी बरतने को कहा गया है। इसके लिए संक्रमण से बचाव के उपाय भी बताए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिषन के संचालक श्री आर. प्रसन्ना ने आज यहां बताया कि बरसात के दिनों में आंखों के संक्रमण की संभावना अधिक होती है। मौसम परिवर्तन के साथ कीटाणुओं की संख्या बढ़ जाती है, जिसके कारण विषेषकर आँखें लाल होने की समस्या बढ़ जाती है। संक्रमण की बीमारियाँ बढ़ने से कंजंक्टिवाइटिस के रोगी भी बढ़ने लगते हैं। इसे कंजक्टिवाइटिस अथवा आँख आने की बीमारी एवं आँखों का संक्रमण कहा जाता है। यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलने वाली बीमारी है। अतः आवष्यक सावधानी एवं उपाय करना चाहिए।

कंजक्टिवाइटिस से बचाव के लिए सभी को सादा चश्मा लगाना चाहिए। आँखों को नहीं छूना चाहिए। साफ पानी से आँखों को धोना चाहिए। रोगी द्वारा उपयोग की हुई वस्तुएं रुमाल, तौलिया आदि उपयोग नहीं करना चाहिए। इतनी सावधानी रखने से कंजंक्टिवाइटिस से काफी हद तक बचा जा सकता है। आंख आने के प्रमुख लक्षण- आंख आने के प्रमुख लक्षण में आँख का लाल हो जाना है, आँख से चिपचिपा पदार्थ आना, आँख में चुभन होना, आंसू आना और दर्द होता है। इस बीमारी का उपचार एंटीबायोटिक आई-ड्रॉप से किया जा सकता हैं। उपचार के तरीके- सर्वप्रथम नजदीक के सरकारी अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ से सलाह व उपचार अवष्य कराएं। चिकित्सकों से सलाह कर आइ-ड्रॉप को आँख में 6 बार, तीन दिन तक डालने से यह बीमारी ठीक हो जाती है। आँख को साफ पानी से धोना चाहिए। तीन दिन में ठीक न हो तो पुनः चिकित्सक से सलाह लेना चाहिए। कभी-कभी यह बीमारी उपचार न कराने पर गंभीर हो सकता है। तीन दिन में यह बीमारी ठीक न हो तो कॉंर्निया में घाव हो सकता है। यह बैक्टीरियल संक्रमण नहीं है। दोनों स्थितियां गंभीर हैं और आँखों की रोशनी को प्रभावित कर सकती हैं। यहाँ तक कि आँख की रोशनी स्थाई रूप से नष्ट हो सकती है। अतः लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। तत्काल चिकित्सक से उपचार कराना चाहिए। एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है यह बीमारी- रोगी की आँखों से जो द्रव्य बहता है उसमें कीटाणु होते हैं। रोगी बार बार आँख को छूता है तो उसके हाथ में कीटाणु आ जाते हैं, फिर वह जिस भी वस्तु को छूता है। कीटाणु वहां पहुँच जाते हैं और जब दूसरे व्यक्ति उस वस्तु को छूते है तो वह भी संक्रमित हो जाता है। यही कारण है कि हाथ मिलाने से तथा भीड़ वाली जगहों सिनेमाघर, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, स्कूल, कॉलेज आदि जगहों में यह बीमारी ज्यादातर फैलती है।

गर्भवती माताओं की एचआईवी जांच जरूरी

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत प्रत्येक माह के नौ तारीख को निःशुल्क जाँच

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने गर्भवती महिलाओं से एचआईवी एड्स की जाँच कराने की अपील की हैं। जिससे जन्म लेने वाले शिशु  एचआईवी मुक्त पैदा हो सकें। इसी तारतम्य में राज्य सरकार द्वारा प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत प्रत्येक माह की नौ तारीख को सभी सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं की एचआईवी जाँच निःशुल्क कराएं जा रहे हैं।

संचालक स्वास्थ्य सेवाएं श्रीमती रानू साहू ने आज यहां बताया कि सभी गर्भवती महिलाओं की एचआईवी जांच जरूरी है। गर्भवती महिलाओं को एचआईवी का संक्रमण होने की स्थिति में भी डरने की बात नही हैं। बच्चे को एचआईवी संक्रमण मुक्त करने के लिए जाँच व परामर्ष केन्द्र में जाकर जाँच एवं उपचार करा सकते हैं। जाँच केन्द्रों में एचआईवी की दवाईयां  निःषुल्क प्रदान की जाती है। उन्होंने बताया कि षासकीय अस्पताल में गर्भवती माताओं को सर्वप्रथम अपना पंजीयन कराकर सभी जाँचों के साथ एचआईवी की भी जाँच अवष्य करानी चाहिए। प्रथम जांच में ही एचआईवी का संक्रमण पता चलने से गर्भवती माताओं को एआरटी से लिंक करते हुए दवाई दी जाती हैं। शासकीय अस्पताल में एचआईवी संक्रमित गर्भवती माता का प्रसव पपश्चात् बच्चे को जन्म से छह सप्ताह तक नेवरापिन का सिरप देकर बच्चे को संक्रमण मुक्त किया जा सकता है। इस दौरान माता शिशु को केवल स्तनपान करा सकती हैं। इससे बच्चा स्वस्थ और तंदरूस्त रहता है।
 स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2016-17 में तीन लाख 93 हजार 475 गर्भवती माताओं की एचआईवी जांच की गई। जिसमें 232 गर्भवती महिलाएं एचआईवी संक्रमित पाई गई। गर्भवती माताओं को जाँच एवं परामर्ष केन्द्र से  निःषुल्क दवा दी गई। शासकीय अस्पताल में 219 माहिलाओं का प्रसव कराया गया, इनमें 213 महिलाओं ने एचआईवी मुक्त बच्चे को जन्म दिया। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेष में 125 एकीकृत जँाच एवं परामर्श केन्द्र/आईसीटीसी केन्द्र तथा पांच स्थानों में पीपीटीसीटी सेंटर संचालित किये जा रहे हैं। जहां पर गर्भवती माताओं की निःषुल्क एचआईवी जांच किये जा रहे हैं। सभी एचआईवी संक्रमित गर्भवती माताओं को एआरटी की दवा लेना अनिवार्य है।